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गुफ्तगू के सहारे सुलझ सकते थे गिले।

                
                                                         
                            ये हिज़्र की रात इतनी मुश्किल क्यूं थी।
                                                                 
                            
एक मुलाकात, इतनी मुश्किल क्यूं थी।।

गुफ्तगू के सहारे सुलझ सकते थे गिले।
मगर , हर बात इतनी मुश्किल क्यूं थी।।

हर सिम्त सावन जमकर बरसा है,मगर।
मेरे घर,बरसात इतनी मुश्किल क्यूं थी।।
-यूनुस खान
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एक घंटा पहले

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