हर सिम्त,अब एक ही नजारा दिखता है।
सुकूँ-चैन भी आज , बेसहारा दिखता है।।
साहिल पे पहुंचने का, जुनून है इस कदर।
बीच मंझधार भी अब,किनारा दिखता है।।
-यूनुस खान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X