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समंदर का प्रहरी

                
                                                         
                            कोई सागर कहता है, कोई तूफ़ान समझता है,
                                                                 
                            
कोई इसको लहरों का बस अरमान समझता है,
मगर जो खड़ा है सीने पर तिरंगा लिए,
उसे हर हिंदुस्तानी अपना अभिमान समझता है।
कोई लहरों से पूछे, कहाँ तक जाओगे,
कोई पूछे, तूफ़ानों से कब तक टकराओगे,
हमने हँसकर कहा—देश की आन के वास्ते,
जहाँ साँस जाएगी, वहीं तक जाओगे।
न घर की पुकार हमें रोक पाएगी,
न माँ की आँख हमें वापस बुलाएगी,
माँ ने कहा—“बेटा, देश पहले रखना,”
तो ये जान भी भारत पे कुर्बान जाएगी।
ये वर्दी नहीं है, ये विश्वास है,
इसमें करोड़ों दुआओं की साँस है,
जहाँ तिरंगा लहराए समंदर के बीच,
वहीं हिंदुस्तान की असली आवाज़ है।
तूफ़ान उठे तो हम राह बनाएँगे,
लहरें रोकें तो लहरों को हराएँगे,
जिस दिन भारत माँ ने आवाज़ दी,
उस दिन समंदर को भी पार कर जाएँगे।
कोई सागर कहता है, कोई तूफ़ान समझता है,
कोई हमको सिर्फ़ एक जवान समझता है,
मगर हमसे पूछो तो हम क्या हैं—
हम वो हैं जिन्हें भारत अपना अभिमान समझता है। ,
कोई पूछे विशाल से, तू आखिर चाहता क्या है,
तो कह देना—दिल में बस हिंदुस्तान रहता है,
मेरी चाहत है, सागर की हर लहर ये गीत सुनाए,
तिरंगा ऊँचा रहे और भारत सदा मुस्कुराए।
 
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3 घंटे पहले

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