यूँ तो आती है
ख़ुशबू अब भी फूलों से
मगर मदहोश
नहीं करती अब
जैसे किया करती थी
तुम पास थे जब
बरसते है मेघ
यूँ तो अब भी
मगर मोर पंख अब
नहीं फ़ैलाते
जैसे नाचते थे
तुम साथ थे जब
-विनोद यादव 'शहीद'
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