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यूँ न गम

                
                                                         
                            यूँ न गमशुदा हों हमें देख करके।
                                                                 
                            
वो कह दे तो जाएं शहर छोड़ करके।
ये माना के वो धड़कने हैं हमारी।
चलो जी के देखे जिगर तोड़ करके।
मेरे साथ में वो भला क्यों चलेंगे।
हमी चल दिये हैं डगर मोड़ करके।
नहीं देखना है इन आँखों में अब कुछ।
मिला है बहुत कुछ नजर जोड़ करके।


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6 वर्ष पहले

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