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तो देखिये

                
                                                         
                            दिल की चुभन तुम्हारी होगी जरूर कम।
                                                                 
                            
कांटा किसी के पांव से निकाल कर तो देखिये।
हर इंसान तुम्हे अपना सा लगने लगेगा बस।
आँखों से मज़हबी चश्मा हटा कर तो देखिये।
नज़रों में लोग रब की तरह तुम को उठा लेंगें।
गिरते हुए लोगों को उठा कर तो देखिये।
यूँ किस्मत की लकीरों को कोसने से अच्छा।
मेहनत पर खुद की भरोसा करके तो देखिये।
यूँ ऐसे आसमान में चमका नहीं करते।
तारों की तरह खुद को जलाकर तो देखिये।
रोटी की कीमत हो तुम्हें जो जाननी कभी।
भूखे किसी गरीब को खिला कर तो देखिये।
मिलना हो जो रोज़ रब से तो ये काम कीजिये।
अपने माता पिता के पांव दबाकर तो देखिये।
बन जायेंगे निशान एक दिन तेरे नाम के।
वादे किये थे जो वो निभा कर तो देखिये।
महफूज़ रखेगा वो इन हवाओं से भी तुम्हें।
आग़ोश में तो उसकी तुम जा कर के देखिये।
क्यों हर किसी की कमियों को खोजते हो तुम।
गर हो सके तो उनकी अच्छाईयों को देखिये।

viMal


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6 वर्ष पहले

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