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सावन का आख़िरी सोमवार

                
                                                         
                            सावन का आख़िरी सोमवार है,
                                                                 
                            
आज फिर भोले के दरबार में जाना है,
जो दर्द दिल में छुपा रखा है वर्षों से,
वो सब शिव के चरणों में सुनाना है।

न माँगा कभी सोना, न चाँदी का संसार,
बस बना रहे महादेव का सिर पर हाथ अपार।
जिस राह में काँटे हैं, उस राह को भी स्वीकार है,
क्योंकि साथ मेरे मेरे भोलेनाथ का प्यार है।

जिसके सिर पर हाथ महादेव का होता है,
वो इंसान कहाँ कभी अकेला होता है।
देर भले हो जाए भोले के दरबार में,
पर फैसला हमेशा महाकाल का होता है।

आज आख़िरी सावन सोमवार पर बस इतनी सी अरदास है—
हे नीलकंठ! मेरे अपनों के जीवन में सुख-शांति भर देना,
हर दुःख हर लेना और हर चेहरे पर मुस्कान कर देना।

 
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4 घंटे पहले

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