जिसने ठोकर मार दी मेरे प्यार को,
उस पर ऐतबार क्या ही रखें।
जिसने तोड़ा है दिल बार-बार मेरा,
उससे फिर कोई इकरार क्या ही रखें।
जिसे मतलब रहा सिर्फ़ अपनी खुशी से,
उससे रिश्तों का आधार क्या ही रखें।
जो समझ ही न पाया दिल की भाषा,
उससे फिर दिल का इज़हार क्या ही रखें।
वक़्त ने सिखा दिया है इतना हमें,
हर किसी को दिलदार क्या ही रखें।
जो निभा न सका साथ दो क़दम भी,
उससे जीवन का करार क्या ही रखें।
जिसने आँसू दिए मुस्कुराहट के बदले,
उससे खुशियों की बहार क्या ही रखें।
अब जो खो गया, उसे खोया ही रहने दें,
उसकी यादों का भार क्या ही रखें।
हमने चाहा था उसे हद से भी ज़्यादा,
अब उससे कोई सरोकार क्या ही रखें।
जिसने ठुकरा दिया सच्चे प्यार को,
उस पर फिर ऐतबार क्या ही रखें।
— विकास त्रिपाठी “विक्की”
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