तटिनी तू
और तट मैं तेरा
जल ही जल तू
और तल का मै थल
डूबा ही रहूं
घुलता ही बहूँ
संग तेरे रहूं
क्या और कहूं
है परिणति तक
आलिंगन मेरा
तटिनी तू
और तट मैं तेरा
कल जो था
छिछला थल था
तुम संग जो बहा
"मैं"क्या ही रहा
शुभ नियति यही
संग तेरा मेरा
तटिनी तू
और तट मैं तेरा
- विकास मोहन गुप्ता
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