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स्वर्णाक्षर में नाम रहेगा युगों युगों तक।

                
                                                         
                            स्वतंत्रता के अम्बर में ध्रुव तारे सा टिम टिमा रहा,
                                                                 
                            
धूमिल पड़ जाते सारे स्वतंत्रता सेनानी,
एसेंबली पर बम फेंक,
सांडर्स की हत्या कर,
ब्रिटिश प्रशासन की नींव हिला दी,
इंकलाब जिंदाबाद के नारे से गूंज रहा हाल,
भारत का वीर सपूत भागा नहीं,
कारागार गया,
भेदभाव पर की भूख़हड़ताल,
यातनाओं को झेला,
काया बनी जुल्मों की कहानी
मंगेतर देख नहीं विचलित हुआ हृदय,
स्वतंत्रता का पथिक हूं,
वैवाहिक जीवन नहीं मेरे लिए,
स्वतंत्रता के पथ पर ध्रुव तारे से टिम टिमा रहा,
आजादी की चिंगारी सुलगा,
आग की लपटें उठने लगीं
स्वतंत्रता की नींव,
बच्चा बच्चा बोल रहा इंकलाब जिंदाबाद,
स्वतन्त्रता के अम्बर में ध्रुव तारे सा टिम टिमा रहा,
सर्वस्व न्यौछावर कर दिया,
हंसते हंसते शूली पर चढ़ गए,
स्वर्णाक्षर में नाम रहेगा युगों युगों तक।
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एक घंटा पहले

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