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कोमल फ़ूल देखो आज, कैसे झुलस रहे हैं।

                
                                                         
                            कोमल फ़ूल देखो आज, कैसे झुलस रहे हैं।
                                                                 
                            
दुनियां वालों संभल जाओ, शैतान जाग रहे हैं।
जिन कलियों ने अभी खिलना था, क्यों सूख रहीं हैं?
खुशबू से जिसने जग महकाना था, क्यों टूट रही हैं?
दुनियां के गलियारों में थी, जिन्होंने रौशनी फैलानी।
क्यों अंधियारे में डूबीं, आज की नई जवानी?
गर्दिश में डूबते सितारे लग रहे हैं ।
दुनियां वालो संभल जाओ, शैतान जाग रहे हैं।
कब तक करोगे अपना-अपना, रहोगे सीमित अपने तक?
दावानल में अपना ही घर बचाना, बहुत बड़ी नादानी है।
दुनियां वालो तैयार रहो,जग की आग बुझानी है।
संस्कारों से कर समझौता, प्रगति की दौड़ बचकानी है
दुनियां वालो जाग जाओ,ये भावी पीढ़ी बचानी है।
भाईचारे की मजबूत ईंटों से मजबूत घर बनाने है।
चेतना का बिगुल बजा कर नये फूल बचानें हैं।
युद्ध बड़ा संघर्ष कड़ा है।----------------
पर मजबूत किला बनाकर , नफरत की दीवार गिरानी है।
दुनियां वालो मान जाओ,जग जन्नत बनानी है
हां जग को जन्नत बनाना है।
         
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37 मिनट पहले

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