तुम सदा ही प्रेम का प्रतिमान हो।
तुम ही मेरी अस्मिता परिधान हो॥
तुममें मैं हूं मुझमें तुम हो।
तन हूँ गर मैं तुम ही मेरे प्राण हो॥
तुम ही मेरी नेह की अभिप्रेरणा हो।
तुम ही मेरे साध्य मेरी साधना हो॥
तुम ही मेरे जीवन का हर रंग हो।
मन मेरा हर्षित हुआ है जो तुम मेरे संग हो॥
तुम ही मेरे आस हो विश्वास हो।
यह है मेरी प्रार्थना सर्वदा तुम मेरे साथ हो॥
-विजय तिवारी
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