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किसे अपना कहूं, किसे गैर

                
                                                         
                            किसे अपना कहूं, किसे गैर।
                                                                 
                            
यहां सब कोई अपना लगता है।
न जाने गांधी के देश में लगी आग क्यों ?
हिन्दू-मुस्लिम में रोज़ झगड़ा लगता हैं।
किसे अपना कहूं, किसे गैर।
यहां सब कोई अपना लगता हैं ।
न जाने इस दंगे में, कितने घर उजड़ गए ।
मां-बहनों की आंचल, उजड़ा लगता है।
किसे अपना कहूं ,किसे गैर ।
यहां सब कोई अपना लगता है।

विक्की कुमार आनंद


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6 वर्ष पहले

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