योग और संगीत, स्वास्थ्य के दो मीत।
रहे तन निरोग, गाए खुशहाली के गीत।
ले संतुलित आहार, प्रातः सैर प्राणायाम।
स्वर साधना से हो मस्तिष्क का पूर्ण व्यायाम।
कुदरत भी गाए खूब धुन मधु मतवाली
झूमे पल्लव पुष्प, कूके कोयल काली।
एकाग्र, प्रसन्नचित और सरल व्यवहार
योग और संगीत मिलकर जब करें कमाल।
- वंदना अग्रवाल 'निराली'
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