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एक दूसरे से अलग होना

                
                                                         
                            आस चली गई, सांस चली गई
                                                                 
                            
चली गई लोगों की जान....
सब कुछ जाने के बाद..
फिर खिली वही धूप , खुला वही मौसम, दिखा वही आसमान....
लेकिन फिर दिखी नहीं,,
किसान के चेहरे पर पहिले जैसी मुस्कान...
कैसे दिखे, कैसे दिखे
तिनका तिनका खेतों में बिखरा,
टूटे पेड़ पड़े रस्तों पर, जिधर भी देखा पानी पानी
सिर्फ पानी से होगा बसर कैसे.....
सिर्फ पानी से होगा बसर कैसे....
-आशीष सिंह
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एक घंटा पहले

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