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सोलह शृंगार करके

                
                                                         
                            लाल जोड़े में, सोलह शृंगार करके,
                                                                 
                            
दिल में तुम्हारा प्यार, आँखों में ख़्वाब भरके।
हाथों की मेहंदी में नाम तुम्हारा सजाऊँगी,
हर जन्म में बस तुम्हें ही अपना बनाऊँगी।
माथे की बिंदिया में तेरा नूर सजाऊँगी,
पायल की हर छन-छन में तेरा नाम गुनगुनाऊँगी।
चूड़ियों की खनक में तेरा एहसास होगा,
मेरी हर धड़कन में बस तेरा ही नाम होगा।
जब चाँद को छलनी से निहारूँगी मैं,
उस चाँद में भी तेरा चेहरा सँवारूँगी मैं।
तुम सामने होगे, हाथों में मेरा हाथ होगा,
उस पल से हसीन न कोई जज़्बात होगा।
-राहिब सुल्तानपुरी
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7 घंटे पहले

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