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"जानता हूँ , फिर भी नही मानता हूँ"

                
                                                         
                            अपने दुःख का कारण मैं ख़ुद हूँ, यह जानता हूँ, फिर भी नहीं मानता हूँ।
                                                                 
                            
सोशल मीडिया की दुनिया मुखौटे वाली है, यह जानता हूँ, फिर भी नहीं मानता हूँ।
वक़्त के दरिया में बह जाएँगे सब अपने, यह जानता हूँ, फिर भी नहीं मानता हूँ।
माँ-बाप एक उम्र के बाद बच्चे बन जाते हैं, यह जानता हूँ, फिर भी नहीं मानता हूँ।
कुछ ख़ास अक्सर कहते हैं कि तू जानता है, मगर मैं जानता हूँ कि मैं जानता हूँ, फिर भी नहीं मानता हूँ।
-अर्जुन सिंह राठौड़
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6 घंटे पहले

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