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मगर कहीं अधिक एक उदासीन सा सपना हूं

                
                                                         
                            तुम ढूंढ रहे हो मुझ में ,
                                                                 
                            
जो मैं हूं नहीं
पर मैं बनना चाहती हूं वैसा
जैसा तुम ढूंढ रहे हो मुझ में _

इस तुम में तुम हो
कुछ वो शख्स है,
जो मुझे ज्यादा नहीं
थोड़ा सा जानते हैं
और यह बात तुम अच्छे से जानते हो कि
अनगिनत ना सही पर _
कुछ से थोड़ी अधिक सी शख्सियत है
जो मुझे थोड़ा सा जानती हैं .....

तुम देख रहे हो मुझ में ;
एक खूबसूरत सा ख्वाब जो दशकों तक चले
ताबीर उसकी कहीं गहरी सी रूमानी हो
और लौट जाने के बाद
उसके ख्याल भी सुहाने हो....

पर मैं हूं कि_
शायद कभी सुकून हो
मगर कहीं अधिक एक उदासीन सा सपना हूं
जो थोड़ सा चल ठहर जाता है_
हल्की रोशनी,
एक सवेरा
और वो गुजर जाता है ....
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3 घंटे पहले

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