आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जो तेरी अद्वितीयता बतलाए

                
                                                         
                            अम्मा ने जब खिड़की खोला
                                                                 
                            
हठ कर, चाँद अम्मा से बोला
दे दो एक आइना गोल
जिसमें खुद को देखूँ रोज़

हँसकर अम्मा झट से बोली
क्या करेगा आइना गोल
तू तो है सुंदर चकोर
तेरी तो सब नज़र उतारे,
सुंदरता तेरी निहारे,

सुन अम्मा से अपनी प्रशंसा
खुश हो गया रोता हुआ चंदा,
बोला— "अम्मा तू ऐसा कहती है,
दुनिया तो कुरूप कहती है,

विशेष दिन में सबको भाऊँ
चाहे मैं जैसे भी आऊँ,
आधा, पूरा या ना आऊँ,
सबके लिए मैं पूज्य हो जाऊँ,

शेष दिन में सज के आऊँ,
फिर भी ना किसी को भाऊँ
दिखते हैं चेहरे पर दाग
सुनकर मैं कहीं छुप जाऊँ

दे दो अम्मा एक आइना गोल
जिसमें खुद को देखूँ रोज़।

अम्मा ने मुस्का कर बोला
तू है सुंदर विशालकाय गोला
संशय ना कर तू, है कुरूप
तू है ईश्वर का अग्रिम रूप
विशेष दिन तू पूज्य हो पाए,
जो तेरी अद्वितीयता बतलाए

फिर भी दूँगी आइना एक
जिसमें दिखे तेरी छवि अनेक।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर