जाते-जाते बप्पा बस एक आरज़ू है,
मेरी छोटी-सी विनती को पूरी करते जाना।
जहाँ कहीं अन्याय हो इस धरती पर,
वहाँ न्याय की मुहर लगाते जाना।
जिसके मन में दर्द हो, उसे सुकून देना,
जिसकी आँखों में आँसू हों, उन्हें मुस्कान देना।
जो राह भटक जाए, उसे सही राह दिखाना,
हर निर्बल को बप्पा अपना बल दे देना।
हर घर में प्रेम और खुशियाँ बरसाना,
नफरत के अंधेरों को दूर भगाना।
जो सच की राह पर चलता है अकेला,
उसका हाथ थामकर उसे हौसला देना।
जिसके हिस्से में दर्द और आँसू आएँ,
उसके जीवन में खुशियों के फूल खिला देना।
सच्चाई की जीत हो, असत्य हार जाए,
ऐसा सुंदर संसार बनाते जाना।
जाते-जाते बप्पा इतना कर जाना,
अगले बरस जल्दी आने का वादा कर जाना।
-नीता श्रीवास्तव
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