आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तबियत माकूल रहे अगर

                
                                                         
                            मोहब्बत का उन सब को लुफ्त मिलता।
                                                                 
                            
प्यार का रास्ता घूमकर जब कहीं मिलता।।

शिद्दत से चाह कुबूल मुझे भी उन्हें भी।
जिस्म के हर हिस्से को उफान मिलता।।

जिज्ञासा झलकती जिनकी ढलान के बाद।
उन्हीं की नजर को नजर से इनाम मिलता।।

तबियत माकूल रहे अगर 'उपदेश' मेरी।
ऐसे माहौल को प्यार का अंजाम मिलता।।

लाचार समझते नही स्वस्थ रखते खुद को।
इस तरह के इंसानो को इत्मीनान मिलता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर