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नई उमर में सपने

                
                                                         
                            नई उमर में सपने ऊन की तरह उलझते।
                                                                 
                            
सुलझ जाए जो उन्हें आँचल में सहेजते।।

साँस भी सोचने लगे हदो में रहना जरूरी।
ऐसे लोग कभी नही चिनगारी में सुलगते।।

फिर अपनी चादर बुन लेना तुम गरिमा की।
प्रेरित होकर नये रास्ते इन्हीं चाल में बनते।।

समझाने की जद्दोजहद में नरमी न खोना।
भविष्य की बनाई गई फाइलों में झाँकते।।

कभी माँ की आँखों ने दिशा निर्देश दिया।
सही राह 'उपदेश' खुद के भीतर में जगते।।

बेटियों को सलाह है इतना मत फैल जाना।
फैलो तो बस उतना खुद के काबू में रहते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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13 घंटे पहले

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