आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

किसी मौसम से नही हारी

                
                                                         
                            किसी के ख्वाब सजाने के लिए मेहनत तुम्हारी।
                                                                 
                            
हर वक्त कुर्बानी देती किसी मौसम से नही हारी।।

अपने किए पर भरोसा सब की इज़्ज़त का ख्याल।
फ़ैसले लेकर कायम रहती हद में रहकर नही हारी।।

खुशी के आँसू बहाती खुद पर मंद-मंद मुस्कुराती।
इतराने के बहाने खोजती भीतर हिम्मत नही हारी।।

तुम्हारे कामयाबी के किस्से सुनाने में गर्व जिनको।
उन्हीं की तबियत बिगड़ी तुम्हारी जिद्द नही हारी।।

झूठ से बचती 'उपदेश' जज्बाती शख्सियत रखती।
जी-जान लगाकर रिश्ता चलाती लिखती नही हारी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर