इश्क को कोई तारीख से ना बाँध प्रिये।
दिल करे 'उपदेश' तो बाहों में भर प्रिये।।
निशाना खूब साधो तीर चला मत देना।
ठहराव में आनन्द भरपूर पाओगे प्रिये।।
दुनिया ने मुकर्रर की तारीखे व्यापार बस।
तारीखों के चलन में रफ्तार न भर प्रिये।।
अगर गुबार है तो फूटेगा वक्त आने पर।
आती होली में रंग से भर दूँगी तुझे प्रिये।।
मेरी मुस्कुराहट की चमक जाने न देना।
चाहे कुछ हो जाए सँभालना मुझे प्रिये।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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