कभी-कभी बहुत याद आते
कुछ लोग कुछ पल कुछ बाते
जो आज में नही होती लेकिन
कल को बेहद खूबसूरत बना देते
ज्यादा की उम्मीदे कब की मैंने
थोड़ा ही काफी मेरे लिए करते
जी लेती मैं संग तुम्हारे ही सहारे
कुछ एहसास, सुकून चुरा लाते
क्या इतना भी हक नही था मेरा
कभी रिश्ते के नन्हे पंख सहलाते
खुला आकाश खुली पलकों से
सुनहरी किरणों में कभी उड़ जाते
बिखरा दिया है तूने मुझे 'उपदेश'
अल्हड से सारे सपने धूमिल होते
न समेट पाऊँगी न सिमट पाऊँगी
कुछ एहसास समेटे टूटे से लगते
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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