घर जाओ यह रक्षाबंधन का त्योहार है,
झूठे रूपी संसार खुशियों का मनोहर है।
बहन भाई के इस अटूट प्रेम ने,
यूँ नदियों की धार को बदला डाला
प्राण जाये तन जाये मनोहर की,
जाये यह संसार प्रेम आज मनोहर उज्जवल है।
सदा बना रहे हर कण-क सृष्टि के हर कण-कण,
भाई-बहन का प्रेम महान सबके,
बहन भाई का तो प्यार है।
रक्षाबंधन का त्योहार है, प्रेम आज उज्जवल हर
खुशियों का मनोहर है। मनोहर मूरति श्याम रस
दुनिया बदल जाये यह,
भाई-बहन का प्रेम ना टूटे।
सृष्टि के अनंत काल पर चलता रहे,
सदा-सदा फलता रहे।
ऐसा है यह ऐसा कर लो अटूट प्रेम,
कितनी भी विपत्ति हो कितनी भी,
आखिरी दम तक आ पाये सा सदा बना,
करते रहो।
यह प्रेम जगत का पागल है,
यह तराना है।
यह ढूंढता है आकाश तारे,
पूरी दुनिया यह ढूंढता है हर कण-कण,
ऐसा यह अटूट प्रेम है।
प्रेम का संसार का यह स्वरूप,
दुनिया के रंगों में इसका हुनर है।
विपत्ति में अडिग रहा खड़ा रहा,
आखिरी दम तक अपनी बहन की रक्षा,
करते रहो।
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