अपने अरमान का गुलशन नहीं जलने दूँगी
मैं तेरे दिल में रक़ीबों को न पलने दूँगी
बख़्त का लेख भी वल्लाह मैं बदल डालूँगी
इश्क़ के खेल में रब की भी न चलने दूँगी
— त्रिशिका धरा
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