सजाकर भाव की थाली, चले हम द्वार पर आये
तुम्हारी वंदना में गीत भी हमने मधुर गाये
अतिथि का रुप लेकर जो स्वयं भगवान आये हैं
तुम्हारे पाँव धोने को नयन में अश्रु भर लाये।
-सुशीला श्रीवास्तव
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