साहित्यिक सब हो रहे,
चबली चोर चकार।
व्हाट्स एप पर इतरा रहे,
कर सोलह श्रृंगार।
सोशल पटलों में बड़ा,
मचा हुआ कोहराम ।
रचनाएं बिखरी पड़ीं,
इधर की उधर तमाम।
साहित्यिक ग्रुप सज रहे,
जैसे नई दुकान।
कुछ मीठा सा बेचते,
कुछ फीके पकवान ।
हर कोई फेंक रहा है ,
अपना साहित्यिक ज्ञान।
छंद छबीले रच रहे,
कुछ बेछन्द विधान।
हिंगलिश में रचना करें,
हिंदी होती दूर।
शब्दजाल में फंस पड़ी,
कविता है बेनूर।
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