इस मोहब्बत का असर , दिल पर हुआ तो है,
कभी खरोच लगी, कभी टूटा, ये हुआ तो है।
नजर, नजर की ये बातें , नजर से होती है,
तेरी नजर का असर, दिल पर हुआ तो है।
निगाहें मिलती हैं, दिल मिलते हैं, बिछड़ने को,
ये खेल दुनिया में हमसे भी, हुआ तो है।
तू साथ थी तो; इक चमक थी, जिंदगानी में,
तू जो गई तो ये जिंदगी, धुआं धुआं तो है।
दिल के ये जख्म जमाने को दिखाएं कैसे,
दर्द में उनके दिल मेरा, रूआं रूआं तो है।
हम जमाने से यूं बेज़ार हुए जाते हैं,
के भीड़ में भी ये दिल, कटा कटा तो है।
मोहब्बत हम जो न करते तो मर गए होते,
तुमने दिल दिया हमको, ये दुआ तो है।
सुशील कुमार
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