आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मोहब्बत का असर

                
                                                         
                            इस मोहब्बत का असर , दिल पर हुआ तो है,
                                                                 
                            
कभी खरोच लगी, कभी टूटा, ये हुआ तो है।

नजर, नजर की ये बातें , नजर से होती है,
तेरी नजर का असर, दिल पर हुआ तो है।

निगाहें मिलती हैं, दिल मिलते हैं, बिछड़ने को,
ये खेल दुनिया में हमसे भी, हुआ तो है।

तू साथ थी तो; इक चमक थी, जिंदगानी में,
तू जो गई तो ये जिंदगी, धुआं धुआं तो है।

दिल के ये जख्म जमाने को दिखाएं कैसे,
दर्द में उनके दिल मेरा, रूआं रूआं तो है।

हम जमाने से यूं बेज़ार हुए जाते हैं,
के भीड़ में भी ये दिल, कटा कटा तो है।


मोहब्बत हम जो न करते तो मर गए होते,
तुमने दिल दिया हमको, ये दुआ तो है।

सुशील कुमार
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर