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प्रभु -कृपा

                
                                                         
                            सच में ,
                                                                 
                            
यह जीवन बरदान से - -
कम नहीं है,
प्रभु ने - -
दान स्वरूप में,
दो मजबूत हाथ
और - -
जीवनरूपी यात्रा,
के लिए - -
दो मजबूत पैर ,
भी प्रदान किये - -
और ,
इच्छा अनुसार,
सारे संसाधन भी - -
जुटाये,
यदि उसे - -
प्राप्त ना करो,
या हासिल न - -
करो तो,
फिर आप - -
किस पर,
दोष लगाओगे l

इसी क्रम में ,
कहा गया है - -
जीवन जीना भी ,
मजबूरी से,
कम नहीं है - -
या यों कहे तो,
समझो - -
मन मारकर ,
जिए जा रहे हैं - -
और ,
अपने हालातों से ,
समझौता - -
किए जा जा रहे हैं l

कभी,
हमने भी सोचा था - -
अपना भी,
जीवन जीने का - -
ढंग (लाइफ स्टाइल ),
एक अलग ही - -
तरिके से होगा,
लिकिन - -
अपने सपनों ,
या ख्वाब को - -
किनारे (ताक पर ) कर,
केवल - -
जीवन जिए,
जा रहे हैं l

एक बूंद भी,
कब बरसेगा - -
तेरे रहमत का,
हम पे - -
इसी आस में,
जिए जा रहे हैं - -
और ,
अश्क़ (आँसू) - -
पिए जा रहे हैं l

और अंत में,
तेरी रज़ा (कृपा ) के - -
आगे औकात ,
क्या किसी के ?
इस लिए - -
अपना किश्मत,
समझकर - -
जिए जा रहे हैं l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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एक घंटा पहले

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