अर्पित पितरों को करें, शुभ श्रद्धा के फूल।
इसमें ही समझें निहित, कर्तव्यों का मूल।
कर्तव्यों का मूल, स्मरें पितरों को अपने।
लें उनसे आशीष, पूर्ण कर लें सब सपने।
कहते वैद्य सुरेन्द्र, इसी में है सबका हित।
निज भावों के पुष्प, करें पितरों को अर्पित।
-सुरेन्द्रपाल वैद्य
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