आशाओं के दीप प्रज्वलित,
विशाल मृग नैनों में तेरे,
धीरज का पुल बांधे,
कहती कुछ अनमोल मुझसे|
सरिता की शित धारा सा वात्सल्य तेरा,
देता अद्भुत शक्ति मुझे,
दृश्य अदृश्य रूप में पथ मेरा आलोकित करती,
चंद्रिका की चादर सी तू गुणों से निखारती मुझे,
मां तू अनमोल हर पल साथ मेरे |
सुप्रिया यादव
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