नारी रूप मे जन्मी मगर, मर्दानी कहलाई
ये थीं दुर्गावती ,पद्मावती और लक्ष्मीबाई
जिनके शौर्य के आगे, विधाता सर झुकाता है
इन्ही वीरांगनाओं से ,हमारी शान ज़िंदा है...1
दुर्गा अष्टमी के दिन ,ले दुर्गा रूप अवतारी
नही एक बार,कई2 बार मुगलों पर पड़ी भारी
जिसने देश की रक्षा की ख़ातिर खुद बलि दे दी
ऐसी सिंहनी का,आज भी बलिदान ज़िंदा है....2
पड़ा जब भी कोई ख़तरा हमारे देश के आगे
दिखा जब रूप चंडी का,तो दुश्मन ख़ौफ़ से भागे
कभी लक्ष्मी,कभी पद्मा, कभी दुर्गा सी रानी से
मेरे भारत की मिट्टी का,ये स्वाभिमान ज़िंदा है...3
किसी के रूप की महिमा,किसी की शौर्य की गाथा
कभी भी हार शत्रु से ,नही झुकने दिया माथा
जिसने देशहित हेतु ,स्वयं को होम कर डाला
इन्ही के त्याग से ही, भारती का मान ज़िंदा है...4
भुजाओं में था दम,दुश्मन भी जिनसे कांप उठते थे
मगर घर मे ही जाने कितने ,उनके साँप पलते थे
नहीं हारी जो दुश्मन से,मगर अपनों से हारी हैं
शक्ल में अपनों की,अब भी वही शैतान ज़िंदा हैं...5
हिमालय जिसके सरपर ताज सी शोभा बढाता है
नही बस देश ये केवल ,सकल भारत की माता है
हज़ारों साजिशें रचकर,जिसे कोई जीत न पाया
जब तक चाँद-सूरज है, ये हिंदुस्तान ज़िंदा है...6
सुनीता पटेल(संस्कारधानी जबलपुर)
मेरी कलम से...
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