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अभी थोड़ा बाकी हूँ

                
                                                         
                            अरसे बाद
                                                                 
                            
साँसों ने घर की
ख़ुशबू पहचानी।

वॉशिंग मशीन में
भीगे कपड़े आपस में
उलझ गए हैं।

बगीचा
अपनी जगह से थोड़ा
बाहर निकल आया है।

खिड़की के पास
चिड़ियों के ख़ाली फ़ीडर पर
चोंच के निशान हैं।

दरवाज़े की
चौखट पर उखड़ गई है
थोड़ी-सी पुताई।

पड़ोसी पूछते हैं..
कैसे हो?
कह देता हूँ.. बेहतर।

उस दूरी को
समझाने से,
बेहतर कहना आसान है।

कई हफ़्तों तक
सफ़ेद दीवारों और
नीले पर्दों के बीच

रहते हुए
घर का रास्ता
भूल गया था।

बस मैं
अभी पूरा का पूरा
वापस नहीं आया हूँ।
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एक घंटा पहले

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