प्रदूषण किसी रूप में हो,
समाप्त होना चाहिए।
इसके विकरालता से
भविष्य को बचाने हेतु,
हरसंभव दिल से यारों,
प्रयास होना चाहिए।
ध्वनि हो चाहे, वायु प्रदूषण,
फैक्ट्रियों का धुआँ,
या पॉलिथीन का प्रयोग,
इनसे जीवन में पड़ने वाले
दुष्प्रभावों का सभी को
आभास होना चाहिए।
केवल बैठकों में नहीं,
दिल की गहराइयों से,
इसके उन्मूलन हेतु
प्रयास होना चाहिए।
संगोष्ठियों में बैठकर,
बड़ी-बड़ी बातें कर,
प्लास्टिक की बोतलों में
पानी को सर्व कर,
सिर्फ कागज़ी न केवल
बात होनी चाहिए।
बातें कड़वी हैं,
पर सच तो यही है।
सच को सच कहने का
साहस होना चाहिए।
और अंत में,
सच में प्रदूषण को लेकर
यदि सजग है अगर,
तो जीवन की संभावनाओं
को अंतरिक्ष में न खोजकर
धरती को सुंदर बनाने का
है गले मानस
प्रयास होना चाहिए।
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