दिसंबर के इंतजार में
जिसको जाना है,
वह तो जाएगा ही।
जीवन किंतु नहीं रुकेगा
जैसे दिसंबर की आख़िरी तारीख़
में उगा था स्वर्णिम सूरज,
जनवरी की पहली तारीख़ को भी
ठीक उसी तरह से सूरज उगा।
समय अपनी रौ में बहेगा।
एक बार फिर दिसंबर के इंतज़ार में
-सुजाता चक्रवर्ती
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