ख्वाबों से नहीं सपने पूरे होते हैं,
अपने हर एक अश्क का
आइना बन जाऊंगा,
छोटा बन कर भी मैं
आइने में आइना बन जाऊंगा,
तुम तोड़ने में मुझे लगे
ये सोचा ही नहीं,
मैं गिर कर भी मसला बन जाऊंगा,
मुझे चलने दो अकेला
मैं अभी सफ़र में हूँ,
रास्ता रोका अगर तो
पत्थर बन जाऊंगा,
सारी महफ़िलों में गिर अहद-ए-जिगर की
तेरे कहने से मैं क्या आइना टूट जाऊंगा,
हमें रोकने की सारी तेरी साजिशें नाकाम हो जाएँगी,
मेरी कद्र उनसे पूछो जिनका मैं सपना बन पाऊंगा
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