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याद उनकीआती रही

                
                                                         
                            हमको याद उनकी आती रही
                                                                 
                            
दिल धडकता रहा पर चुप सा रहा
मौन ने भी अनकहा कितना कहा
याद उनकी पल पल दिलाता रहा.
बातों बातों में उनका छू जाना मुझे
हर पल रोमांचित करता रहा
ठगी सी रही बस देह ये हमारी
याद उनकी हमें आज आती रही.
वो मुस्कराए तो कितनी कलियाँ खिलीं
गुलमोहर गालों पर मचलने लगे
छूकर उन्हें जाने कितनी तरगें
तन मन को तरंगित करने लगीं.
छुआ होठों को उन्होनें जरा सा
खुशबुएं देह से उठने लगीं
आलिंगन में ले विदा जब भी मांगी
देह साथ उनके जाने लगी.
हाय मैं मैं न रही मन मचलने लगा
तेरी छुअन को सहलाता रहा
दिल में प्यार का सागर लिए
मेरे साथ तू भी मचलता रहा.

 
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एक घंटा पहले

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