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अर्जुन जैसा लक्ष्य चाहिए, न्याय सदैव निष्पक्ष चाहिए

                
                                                         
                            मीरा जैसी भक्ति चाहिए, हृदय में अनुरक्ति चाहिए,
                                                                 
                            
तुलसी जैसी पंक्ति चाहिए, मद और लोभ से विरक्ति चाहिए।

हनुमत जैसी शक्ति चाहिए, छल और द्वेष से मुक्ति चाहिए,
सावित्री जैसा सत चाहिए, ज्ञान वेद, पुराण, भागवत चाहिए।

हिम जैसी शीतलता चाहिए, जल जैसी निरंतरता चाहिए,
भीष्म जैसा निश्चय चाहिए, कुबेर सा धन संचय चाहिए।

अर्जुन जैसा लक्ष्य चाहिए, न्याय सदैव निष्पक्ष चाहिए,
माँ जैसी ममता चाहिए, पिता जैसी क्षमता चाहिए।

जन्मभूमि से प्यार चाहिए, नभ तक यश-विस्तार चाहिए।

सुखद अंत और प्रारब्ध चाहिए, सुधा को सुंदर शब्द चाहिए।।
- सुधा पाण्डेय
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36 मिनट पहले

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