नहीं ये चीज है छोटी बड़ा ही नाम है इसका,
पकड़ लेती गलतियों को पकड़ना काम है इसका,
सुधारे कमियों को सबके उन्हें त्रुटिहीन करती है,
ये सबको क्रूर लगती है नाम बदनाम है इसका।
गलत जो काट देती है आफ़त में जान पड़ती है,
सही जो चिह्न लग जाए मधुर मुस्कान खिलती है,
करोड़ो की खुशी देती मगर मिलती बहुत सस्ती,
महज कुछ चंद रूपयों में न महंगा दाम है इसका।
सिखाती है अटल रहना हमेशा लक्ष्य पर अपने,
सफलता भी मिलेगी और होंगे सच सभी सपने,
गगन सा हौसला रखो ये दुनिया सिर झुकाएगी ,
नहीं तो खाक बन जाना ही बस अंजाम है सबका।
न तू है न हूँ मैं और न ही कोई राजा -रानी है,
सुधा की कलम ने लिखी ये खुद अपनी कहानी है,
ये मिलती लाल ,नीली , काली , पीली , हरे रंगों में,
सदा रचती मिसालों को कलम बस नाम है इसका।
-सुधा पाण्डेय
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