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फागुन की शोभा

                
                                                         
                            किया है प्रकृति ने श्रृंगार की देखो फागुन आया है।
                                                                 
                            
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल की देखो फागुन आया है।
हरे गुलाबी लाल बेगनी साथ ही नीले - पीले,
खुशियों की भरमार है लाया फागुन हँस ले जी ले,
घोलने सबके जीवन में मिठास कि देखो फागुन आया है ।
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल .....
रंगों के बिन सूना जीवन कान्हा के बिन होली,
धूम मचाते नाच रहे सब लेकर अपनी टोली,
झूमे मथुरा व्रज गिरिराज कि देखो फागुन आया है।
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल...
श्री के रंग में रंगे हैं मोहन , प्रियतम के रंग प्यारी,
प्रेम के रंग में गोकुल बरसाना मोक्ष के रंग में काशी,
खेलते शिव अविनाशी मसान कि देखो फागुन आया है।
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल...
रंग - बिरंगे फूल खिले हैं मौसम हुआ गुलाबी ,
बाल -वृद्ध सब मगन हो रहे फागुन सब पर हावी,
पवन में घुल रहा है मधुमास कि देखो फागुन आया है।
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल...
हंसी खुशी जीवन बीते अन - धन का भंडार भरे,
मन प्रसन्न हो निरोगी काया दूर सभी अंधकार करे,
सबको दे प्रभु ये उपहार कि देखो फागुन आया है।
उड़ रहे हवा में रंग गुलाल...
स्वरचित' सुधा ' की है ये गुहार कि देखो फागुन आया है। उड़ रहे..
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2 घंटे पहले

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