जाने क्यों लगता है
तुम्हारे बिना मानों कुछ नहीं
सबकुछ तेरा है
तुझसे ही लगता यह जहान मेरा है
आज भी घिरा हूँ तुमसे
तुम्हारे प्यार का
यही तो घेरा है
देखता हूँ
तुममे ही दिन-रात
धूप-छांव,बरसात
तुमसे ही सबकुछ
तुममे ही मेरा बसेरा है
तुम्हारे बिना मानों कुछ नहीं
सब कुछ तेरा है...
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