सच्चाई दिखती हैं बाहर
जब अंतरमन की लगन होती हैं
तिनके -तिनके से घर बनता
इच्छा जब प्रबल होती हैं ॥
परवाह कहाँ हवा झोंके की
पंछी अपना नीड़ हैं बुनता
नहीँ गरज सुन बादलों की
कोई सोच लिये मन में गुनता
वह तो दृढ़ हठी हैं मन का
भला कहाँ किसी की सुनता
एक -एक तिनका जोड़ जोड़ कर
देखो कैसे नीड़ हैं बुनता ॥
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