हरदिन की तरह
गलियों से गुजर रहें होंगे लोग
उसदिन
बात करती औरतें एक दूसरे से
किसी गहन मुद्दे पर
और खेलते बच्चे
अपनी धुन में रहें होंगे
उस अनंत धुंवे के गुब्बार में
डूब जाने से पहले
उसदिन
किसान भी अपने खेतों में
काम रहें होंगे
और चरागाह पर
मौज -मस्ती लिये
घास चर रहें होंगे मवेशी
और पंछी उड़ रहें होंगे
इधर से उधर
खुले आसमान में
उसदिन
पता चल जाने पर भी क्या था ?
बच पायेगा जीवन
यह तो मुमकिन नही था
उसदिन
मन की ईर्ष्या में आखिर
हिरोशिमा और नागासाकी का
कसूर क्या था
उसदिन ? ॥
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