मेरी नाज़ुक पंखुरियों को देख
क्या तुम्हें दया नहीं आई?
अपने प्रणय देवता के लिए
उपहार में देने को मुझे
पाषाण कर तुम अपना
अल्पायु में ही तोड़ मुझे..
क्यों तुम्हें लज़्ज़ा नहीं आई?
धिक्कार! तुम्हारे प्रणय लीला पर
मेरी अस्मत लूटा है..
तुम क्या रक्षा करोगे प्रेमी
प्रेम पुजारिन प्रेमी की
कर न सका जो मेरी रक्षा
असहाय, अबला ,अल्पायु में
बगिया के इस फूलों की
वो क्या खाक करेगा रक्षा
हँसते खिलते यौवन की....
सचमुच वो भी मेरी तरह है
असहाय, अबला, अल्पायु
अलबेली, अल्हड़ मस्त जवानी
तुमसे संभल न सकेगा...
उसकी भी नाज़ुकता....
अगर तू सच्चा प्रेमी है
तो ले आज...ये शपथ
अल्पायु में मत तोड़ना
जीवन की किसी की डोड़..
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