सूरज की सुनहरी मोहक किरणें,
यमुना की लहरों में तैर रही हैं।
मीन खुशहाल है उन लहरों में,
स्वर्णिम छटा बिखेर रही हैं।
नज़रें एकाग्रता खो-खोकर,
इत उत लहरों संग खेल रही हैं।
हिलती रश्मि लहरों के मध्य,
मेरी छवि संग-संग डोल रही है।
उस आभामय दृश्य में डूबी,
पलकें नयनों को चूम रही हैं।
थककर मन भाव-विभोर हुआ,
चाहत जलमध्य ही घूम रही है।
नीलाम्बर जल में विलीन हुआ,
बिन रंग के ही जल नील हुआ।
एकचित्त हो उस दृश्य-पटल को,
मन ही मन मैं बटोर रहा हूँ।
-सूबा लाल "अंजाना"
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