पैसा क्या नहीं करवाता है,
पैसा क्या-क्या कर जाता है।
बड़े-बड़ों के झुके सिरों को,
पल भर में उठवा जाता है।
पैसा जीवन की जरूरत है,
पैसा सुख-सुविधा देता है।
लेकिन केवल धन के बल पर,
कौन यहाँ सम्मान लेता है?
पैसा ही सब कुछ नहीं होता,
धन से बड़ा ईमान है।
इंसानियत ही इंसान की,
सबसे सच्ची पहचान है।
धन से महल बनाए जाते,
प्रेम से घर बस जाते हैं।
धन से रिश्ते जुड़ सकते हैं,
लेकिन प्रेम से निभ जाते हैं।
धन-दौलत का घमंड न करना,
समय बड़ा बलवान है।
आज कोई धनवान अगर,
तो,कल कोई धनवान है।
भूखे को भोजन दे देना,
प्यासे को जल पिलाना।
गिरते हुए को हाथ पकड़कर,
फिर से खड़ा कराना।
दीन-दुखी के आँसू पोंछो,
करुणा का सम्मान करो।
धन तो आता-जाता रहता,
इंसानियत पर अभिमान करो।
दुनिया से विदा होंगे जब हम,
धन-दौलत यहीं रह जाएगी।
अपने अच्छे कर्मों की खुशबू,
दुनिया में बस जाएगी।
पैसा कमाना बुरा नहीं है,
पर पैसे का गुलाम न बन।
इंसान बनकर जीना सीख ले,
इंसानियत से महान बन।
याद रखो, ऐ मेरे साथी,
यही जीवन का सार है।
धन से बढ़कर मानवता है,
यही मनुष्य का असली श्रृंगार है।
-सूबा लाल ‘अंजाना’
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