किसी काम को मत छोटा समझना,
किसी के हुनर को न हल्का समझना।
हर काम की अपनी अहमियत है होती ,
कर्म करने वालों की अलग पहचान होती।
कोई अपनी मेहनत से महल है बनाता,
कोई अपनी बुद्धि से रास्ता दिखाता ।
कोई खेतों में अन्न को है उगाता,
कोई देश की सीमा पर पहरा लगाता।
कोई स्वच्छता का स्वयं ध्यान रखता,
कोई रोगियों की स्वयं सेवा करता ।
कोई पसीना बहाकर कमाता है रोटी,
कोई ज्ञान से है समाज को जगाता।
न कोई काम छोटा, न कोई इंसान बड़ा है,
सबके ही श्रम से ये संसार खड़ा है।
जिस काम कोई है तुच्छ कहता,
उसी का ही जीवन अधूरा पड़ा है।
न। धन-दौलत से कोई महान होता,
न ही ऊँचे पद से किसी का सम्मान होता।
इंसान की असली पहचान उसके कर्म हैं,
उसकी विनम्रता और इंसानियत ही उसके धर्म हैं।
किसी को उसके पेशे से मत आँकना,
किसी के श्रम का न कभी उपहास करना।
आज जो छोटा दिखता है तुम्हारी नज़र में,
कल वही मिसाल बन सकता है इस शहर में।
याद रखना, ऐ मानव! अहंकार न करना,
मेहनतकश इंसान का कभी तिरस्कार न करना।
जो दूसरों के श्रम का सम्मान करता है,
वही सच्चे अर्थों में इंसान कहलाता है।
कविता का संदेश
काम छोटा या बड़ा नहीं होता,
छोटी या बड़ी हमारी सोच होती है।
श्रम का सम्मान और इंसानियत का
आदर ही सच्ची महानता होती है।
— सूबा लाल ‘अंजाना’
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