आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

राहें कठिन हों तो हिम्मत नहीं हारना

                
                                                         
                            चले जा रहे थे जीवन की राह पे,
                                                                 
                            
मगर आ गए कितने काँटों के जंगल।
आए थे चौराहे कई-कई जगहों पे,
मगर सच्ची राह न आई नज़र कहीं पे।

मिली गर होती सही राह की निशानी,
तो आसान हो जाती जीवन की कहानी।
हर मोड़ पर खड़े थे सवालों के पहरे,
किस ओर चलें, जब धुँधले थे सवेरे।

कभी अपनों ने रोका, कभी गैरों ने टोका,
कभी भाग्य ने रूठकर उम्मीदों को रोका।
कभी ठोकरों ने राह का पता बतलाया,
कभी गिरते हुए हौसले ने उठना सिखाया।

भटकते हुए भी कदम रुकने नहीं दिए,
आँखों के सपनों को झुकने नहीं दिए।
माना कि मंजिल का पता मिलता नहीं था,
पर मन में विश्वास का दीप बुझता नहीं था।

'अंजाना ' समझ आया, यही जीवन की कहानी,
हर मोड़ पर मिलती है एक नई निशानी।
जो ठोकरों से सीखकर आगे बढ़ जाता है,
वही काँटों में भी फूल खिलाता है।

राहें कठिन हों तो हिम्मत नहीं हारना,
अँधेरों में उम्मीद का दीपक सँवारना।
सच्ची राह मिलती है अनुभव के सहारे,
जो धैर्य से चलता है, दिन होते हैं उसके प्यारे।
-सूबा लाल ' अंजाना '
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर